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काव्य वही जो रस भावित हो, कवि कर्म वही जो मर्म समाये |

गीत वही जो बसे अधरों पे, अरु कविता सो मन को छू जाये ||

लेख वही जो देख सके, जग क्रन्दन को, जग को समझाये |

साहित्य वही जो सार सहित हो, निज सा लगे,निजता फैलाये ||1||

पौरुष की परीक्षा तब ही होती, जब पग-पग बाधित राह मिले |

भंवर, बवंडर तब होते पराजित, जब साहसी उन्हें मल्लाह मिले ||

जोश पर्याय बने जब जीवन, तब जाकर अधरों के सुमन खिले |

जो सत्य समर में आहुत हो, ऐसी बलिदानी हमको मौत मिले  ||2||

मीत वही जो प्रीत निभाए, गीत वही जो सब जन गाए |

संत वही जो अंत करे सब, स्वाद वही जो रसना भाए ||

दाम वही जो काम दीन हित, ज्ञान वही जो अवसर आए |

कर तो वही उपकार करे जो, नैन वही जो शर्म रखाए ||3||

कर्म वही जो धर्म आधारित, सीख वही जो सत्य सुझाए |

पुरुष वही पर पीर पड़े जो, नारी वही जो नेम निभाए ||

पूत वही कुल कानि रखे जो, भ्रात वही जो धीर बँधाए |

तरु वही सिर छाँह रखे जो, नीर वही जो प्यास बुझाए ||4||

Ummed Deval

Ummed Deval

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