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करने का ज़ज्बा कहाँ गया, खामोश खड़े तरुणाई में |

सागर तट क्यों सीपि चुनते, मोती अतल गहराई में ||

दीवारें हो लाख खड़ी, सब ज़गह पवन संचार करे ,

अपना बल जिसने पहचाना, नमन उसे संसार करे,

पहचान जिओ निज गौरव को, क्या रखा परछाई में |

करने का ज़ज्बा कहाँ गया, खामोश खड़े तरुणाई में ||

घोर नाद जब मेघ करे, प्रत्युतर सिंह गरजता है,

शूर सुने जब रणभेरी, आँखों में रक्त उतरता है,

श्वान मौत क्यों चुने मनुज हम, मरना पीर पराई में |

करने का ज़ज्बा कहाँ गया, खामोश खड़े तरुणाई में ||

प्रचण्ड बने जब नीर, अनल, भय जग वाले खाते हैं,

दुर्बल के सीने पर पाँव जमा, ताकतवर धाक जमाते हैं,

क्यों भुजबल क्षीण बनाये बैठे ? ज़ुल्मी संग लड़ाई में |

करने का ज़ज्बा कहाँ गया, खामोश खड़े तरुणाई में ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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