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A boy holds on to the bank as rough waves crash during Typhoon Usagi in Manila

कैसे पग मैं वापस खीचूं , तूफानों से घबराकर |

सागर से टकराने की, मैंने जिद जो ठानी है ||

तेरे ज़ोश को मेरे साहस से, आज ज़रा टकराने दे |

तूँ पानी के जोर उठा है, मुझ में भी तो पानी है ||

जग में रहकर हमने तो, इतना समझा जाना है |

भिढ़ जाना बाधा हो कैसी, ना लड़ना नादानी है ||

नहीं कल्प का जीना है, खौफ मौत से क्यूँ खाना ?

खर्च करें क्यूँ भीरु बन, ज़ब छोटी सी जिंदगानी है ||

बचपन और बुढ़ापा अक्सर, परवशता में गुजरते हैं |

जग में इतिहास बनाने वाली, केवल एक ज़वानी है ||

जब तक साँस सलामत है, साहस ना हम छोड़ेंगे |

जीते तो एक मिसाल बने, मरे तो ख़त्म कहानी है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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