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gaadi men ghar

वक़्त को जाया क्यूँ करना, औरों जैसा बनने में,

अपने अपने जीने का, अंदाज़ अलहदा होता है |

यूँ तो चाँद और सूरज दोनों, आते जाते रहते हैं,

पर देखो उन दोनों का, आगाज़ अलहदा होता है |

संतानें हैं सभी साल की, समय बराबर सबका है,

लेकिन मौसम अपने का, मिज़ाज अलहदा होता है |

संगीत सभी के सीने में, और सुर भी सारे होते हैं,

अवसर अवसर बजने वाला, साज़ अलहदा होता है |

कुछ तो खुलकर कह लेते, कुछ रखते हैं परदे में,

रिश्ते सभी अहमियत रखते, राज़ अलहदा होता हैं |

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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