Tags

, , ,

Sad_woman_sitting_by_a_fire-1389716159

शीत सुलगती साहिबा, अंग अंग आग लगाय |

कल न पाऊं विरहणी, कोटिक करूँ उपाय ||

शीत सुहाणु साहिबा,पग पग प्रीत पगी |
मैं विरहण जग सूं अलग,सेजाँ आग लगी ||

मैं विरहण जग सूं अलग, कियाँ धीर धरूँ |
धूजे सह जन शीत सूं, मैं तो सुलग मरूँ ||

संग साजन सारी सखी, छत बैठी साजेह |
मो विरहण के कालजे, शूलां सी सालेह ||

जाड़ो ज़ुल्मी साहिबा, पल ना चैन पड़ेह |
शीत बायरो शूल ज्यूँ, छाती मांय गढ़ेह ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements