Tags

, ,

images

दाद-ए-दुनिया पाने की, सब लोग तमन्ना रखते हैं,

ऐबों को रख ओटों में, नेकी की नुमाइश करते हैं ||

वतन परस्ती की बातें, रहती है लबों पर जुमले सी,

आने पर वक़्त-ए-क़ुर्बानी, कितने शहीदी करते हैं ?

जिस्मो ज़वानी की चाहत, आँखों में वहशत के शोले,

पर कितनी शराफत से ये, उल्फत का दम भरते हैं |

वीरान बागबां करते हैं खुद, अपने हाथों गुलशन को,

कुदरत की दुहाई देकर के, ये दरख्त लगाई करते हैं |

पीते हैं लहू, खाते हैं खजाना, अव्वल हैं बेशर्मी में,

मगर बयानों में महारत, झक दामन को रखते हैं |

खंज़र पीठ में हैं फ़ासले, फकत तलाशे मौके तक,

खुदगर्जी में होश कहाँ, अपनों को ज़िबह करते हैं |

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements