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खुद के ना रहे हम तो खुद, और बगावत क्या होगी,

सनम तेरी आँखों से बढ़कर, और क़यामत क्या होगी |

अज़ान,नमाज़ औ” दर्शन का, समय मुकरर्र कर रखा,

ना दीदार तेरे पर पाबन्दी, और इनायत क्या होगी |

छुईमुई छूने से अपना, अंदाज़- ए- हया दिखलाती है,

तुम तो सिमटो देखे भर से, और नज़ाकत क्या होगी |

नाम औ” अक्स लब आँखों में, धड़कन तेरे दम से है,

साँस साँस संग तेरी जुस्तजू, और इबादत क्या होगी |

चिलमन के पीछे से तेरा,दामन को दबाना दांतों में,

हल्के से हँस आँख झुकाना, और शरारत क्या होगी |

अरमान तेरे, ज़ज्बात तेरे, मैंने तो कुछ भी ना रखा,

दिल तक तुझको दे डाला, और ज़मानत क्या होगी |

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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