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de-sushil_pururavas-urvashi_ravi-varma

प्यार का है वास्ता, ना दूर हमसे जाइये,

अश्कों से पहले आप तो, लौट के आ जाइये |

आप ही की वज़ह से, दिल की हैं गुस्ताखियाँ,

क्यों हुए हो आप ख़फा ? वज़ह तो बतलाइये |

बागबां गुल की नज़ाकत, बखूबी पहचानता,

नाराज़गी क्यूँ बेवज़ह ? ना फ़ासले बढाइये |

माहताब औ” महज़बीं, हैं सुकून -ए -सबब भर,

क़रार दिल के पास से, छीनकर ना जाइये |

क्यों चाहतों को आपने ? पहले दी परवानगी,

इस तरह तो अब उन्हें, मिटा कर ना जाइये |

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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