Tags

, , , , , ,

love-seen-painting-500x500  

विस्मृत कर जग बंधन सब, जीने को जी चाहता है |

तारों के मोती किरणों संग, पीने को जी चाहता है ||

था  सर सम इक ठौर थमा, अब अकुताहट होती है,

नदी नीर सा हो के तरंगित,बहने को जी चाहता है |

विस्मृत कर जग बंधन सब, जीने को जी चाहता है ||

है विदित हस्त जल जायेंगे,इनमें आग भरी होती,

पुलकित मन से इन अंगारों को, छूने को जी चाहता है |

विस्मृत कर जग बंधन सब, जीने को जी चाहता है ||

बहुत सही अधरों ने चुप्पी, मौन साधना तोडू मैं ,

उन्मुक्त कंठ और स्वछन्द ताल से, गाने को जी चाहता है |

विस्मृत कर जग बंधन सब, जीने को जी चाहता है ||

सिमटा बैठा कब से नीड़ में, कोई जोश ना उमंग कोई,

पर अब पर फैलाकर नभ में, उड़ने को जी चाहता है |

विस्मृत कर जग बंधन सब, जीने को जी चाहता है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements