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padmini_nayika__the_heroine_whose_breath_is_like_wh91

हौले हौले मेरे मन में, यह कैसा अनुराग जगा ?

बेगानी इस दुनिया में क्यूँ?फिर अपना सा कोई लगा ?

कोमल उर में कितने छाले,इस दुनिया ने दे डाले,

पाबन्दी परवाजों पर है ,अधरों पर चुप के ताले ,

अपना जिसको हमने समझा,उसने आख़िरकार ठगा |

बेगानी इस दुनिया में क्यूँ?फिर अपना सा कोई लगा ||

वीतराग,यायावर मैं,नश्वर,निष्ठुर जग में था,

मुक्ति खोज रहा था उससे,पाश मेरे जो पग में था |

मेरे विश्वासों को हरदम,प्रतिफल में मिला दगा |

बेगानी इस दुनिया में क्यूँ?फिर अपना सा कोई लगा ||

स्वपन सूखे पात रहेंगे,या नव पल्लव फूटेंगे,

शुष्क मरू उर सहगामी,या स्नेहिल निर्झर छूटेंगे |

आशाओं ने पुनः कहा है,तमस निशा को दूर भगा ||

बेगानी इस दुनिया में क्यूँ?फिर अपना सा कोई लगा ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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