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Alone-46

तुमने दिया है मुझको जो प्यार साथियों,

यह जान औ”तन है तुम पे निसार साथियों|

उल्फत की मौत भी तो,शहादत से कम नहीं,

यारी में जाये जान भी सौ बार साथियों|

तुमसे बिछुड़ने का गम भी तो कम नहीं,

टुकडे हुए हैं दिल के हज़ार साथियों|

मेरी दुआ है दोस्तों परवर दिगार से,

पतझड़ मुझे मिले,तुम्हें बहार साथियों|

रखोगे याद तुम सदा,मुझको है ये यकीं,

टूटे न देखो ये मेरा,ऐतबार साथियों|

इस अंजुमन में लौट के,आऊंगा फिर कभी

मेरा है तुमसे यह करार साथियों||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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