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तेरा अर्पण मेरे लिए इसे हार कहूँ,या जीत लिखूँ|

मैं तेरा कवि,तूँ मेरी कल्पना, आ श्रृंगार भरे कुछ गीत लिखूँ||

मधुशाला की मादकता है, तेरी यौवन हाला में,

जी चाहता है जल जाऊँ,इस तपते बदन की ज्वाला में|

कह दूँ इसे मैं दीवानापन,या परवाने की प्रीत लिखूँ|

मैं तेरा कवि,तूँ मेरी कल्पना, आ श्रृंगार भरे कुछ गीत लिखूँ||

तूँ है दिल की धड़कन में,होठों पर है नाम तेरा,

श्रृंगार करूँ अपने कर से,बन  जाये बस यह काम मेरा|

प्रियतमा कहकर तुझे पुकारूँ,या तुझको मनमीत लिखूँ |

मैं तेरा कवि,तूँ मेरी कल्पना, आ श्रृंगार भरे कुछ गीत लिखूँ||

इन्द्रधनुष से रंग के चुनरी,घटा से काजल ले आऊँ,

चन्द्रकिरण से तुझे नहाकर,तारों से आँचल भर जाऊँ|

पायल छनकाती फिर तुम आना,मैं मधुर मिलन का संगीत लिखूँ|

मैं तेरा कवि,तूँ मेरी कल्पना , आ श्रृंगार भरे कुछ गीत लिखूँ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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