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वर्त्तमान में भारत सरकार द्वारा स्वच्छ  भारत अभियान को प्रारंभ किया गया है|सवच्छ्ता की आवश्यकता वहां होती  है जहाँ कोई गन्दगी हो |अब हमें इस बात को तो निसंकोच स्वीकार करना होगा कि हमारा भारत गन्दा है |कहते हुए और लिखते हुए शर्म आती है कि मेरा भारत गन्दा है |सोने की चिड़िया ,स्वर्ग से सुंदर मेरे देश को गन्दा किसने किया?विचारणीय विषय है ?सनातन रीति है कि यथा राजा तथा प्रजा |देश की आज़ादी के बाद से देश के शासकों के मन मैले होते गए ,व्यवस्था में गन्दगी घुलती गई ,जिसका सीधा असर आम जन पर यह हुआ कि जनमानस में यह बात घर कर गई कि कार्य कैसा भी हो अनैतिक तरीके से उसे पूरा किया जा सकता है |शासन व्यवस्था से मिले इस तरीके के सहयोग के कारण लोगो के आचरण गंदे होते गए ,देश गन्दा होता गया |अब शासन व्यवस्था के द्वारा स्वच्छ भारत का नारा दिया गया है ,नीति निर्धारण हो रहे हैं |इससे क्या सचमुच देश स्वच्छ हो जायेगा ?सीधा और सपाट उत्तर है कतई नहीं |अगर सचमुच देश को स्वच्छ बनाना है तो सर्वप्रथम शासन व्यवस्था में व्याप्त गन्दगी को दूर करना होगा |गलती का प्रारंभ जहाँ से हुआ वहाँ से उसका परिमार्जन करना होगा |कोरे नीति और नारों से कोई कार्य सिद्ध नहीं होने वाला है |अगर दम है तो अपनी व्यवस्था में व्याप्त गन्दगी को तथा उसमें शामिल गंदे और भ्रष्ट  लोगों की सफाई से शुरुआत कीजिए और परिणाम में आप पाएंगे कि देश के लोगें के आचरण से गन्दगी स्वतः साफ होती जाएगी |देश के लोगों के आचरण साफ़ होंगें तो देश स्वतः साफ़ हो जायेगा |—————–जय हिन्द !

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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