Tags

lovemenu8

देह के अन्दर दोनों का निवास है |मन भौतिक है, आत्मा परलौकिक है|आप जब भी कोई कार्य करते हैं  तो करने या न करने के दो भाव सदैव उपस्थित होते हैं|जो सकारात्मक सोच उत्पन्न होती है वो आत्मा की आवाज है और नकारात्मक मन की |इससे साफ स्पष्ठ होता है कि आत्मा ईश्वर की प्रतिलिपि है|अगर हम परमात्मा की बात करे तो वह कोई और नहीं सिर्फ आत्मा है जो अपने परम कार्यों से परमात्मा कहलाती है|अगर हम मन की सुनेंगे तो सांसारिक बन कर रह जायेंगे ,उन बुलन्दियों को नहीं छू पाएंगे जो हमें श्रेष्ठता की और ले जाती है|लेकिन अगर आत्मा की आवाज के सहारे चलेंगे तो हमारा नैतिक आचरण दिन प्रतिदिन निखरता चला जायेगा और स्वतः ही बिना प्रयास हम एक दिन श्रेष्ठता के शिखर पर अपने आप को पाएंगे |मन शैतान का प्रतिनिधि है ,आत्मा भगवान की |हम इन्सान हैं  हमारे अन्दर सोचने की शक्ति है ,तय हमें करना है कि हमें क्या बनना है?अगर संसार को स्वर्ग बनना है ,इन्सानियत को जिंदा रखना है, तो हमें आत्मा की आवाज का अनुसरण करना ही होगा |तभी तो कहा है -मन पापी ,मन लालची ,मन कामी,मन चोर |                                                                            मन के मते न चालिए,पलक पलक मन ओर ||     सत्यम शिवम् सुन्दरम् !

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements