Shiv-Vandan:शिव वंदन

शिव

राजत भाल मयंक मनोहर, सर्पन माल गले अति प्यारी।

धार बहे नित गंग जटा बिच, लोचन तीन ललाट मखारी।।

शैल सुता अँग वाम विराजत, गोद गजानन मंगलकारी।

छोड़ सभी छल छंदन को मन, नाम सदा शिव है शुभकारी।

                                                     ———उम्मेद देवल

 

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Namah Shivay :नमः शिवाय

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शिव

राजत भाल मयंक मनोहर, सर्पन माल गले अति प्यारी।

धार बहे नित गंग जटा बिच, लोचन तीन ललाट मखारी।।

शैल सुता अँग वाम विराजत, गोद गजानन मंगलकारी।

छोड़ सभी छल छंदन को मन, नाम सदा शिव है शुभकारी।।

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उम्मेद देवल

 

 

Khilwad: खिलवाड़

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वन काट सपाट किये गिरि को, जल मारग पाट दिया कचरा |

खिलवाड़ किया सँग कुदरत के, विष नीर समीर अपार भरा ||

अनजान  बने  दृग  मूँद  रहे , विपदा  घन  रोज  रहे  गहरा |

जग संकट डूब, अकाल सहे , कर खीझ रहे बरसे बदरा ||

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उम्मेद देवल

Sach:सच

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2016-11-22_uproar54

 

खुद हाथ डुबोय दई लुटिया, बिखरी गरिमा तिनका तिनका |

जब आपहि कारज हीन करे, इसमें फिर दोष भला किनका ||

मुख आदर लानत पीठ मिले, सच जान गई जनता जिनका |

अब मंच रु पंचन साख नहीं , रह केवल नाम गया इनका ||

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उम्मेद देवल

Kab-Tak:कब -तक

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कब तक

नापाक दिखाता आँख इधर है, चीन उधर ललकारे |

जन जिह्वा आक्रोश उबलता, चुप सत्ता के गलियारे ||

जग विख्यात पराक्रम जिनका, खौफ नाम से खाते |

उनको विवश किया है इतना, अदने मार तमाचे जाते ||

है आग सुलगती हर सीने में, नयनों में नीर के धारे |

जन जिह्वा आक्रोश उबलता, चुप सत्ता के गलियारे ||

हथियार दिए पर हाथ नहीं, है यही विडम्बना भारी |

कैसे ऐसे हो सकती है, सीमा पर व घर में पहरेदारी ||

वरना किस की हिम्मत है, जो सैनिक शीश उतारे |

जन जिह्वा आक्रोश उबलता, चुप सत्ता के गलियारे ||

छाती करते माँ की घायल, हम देखें विवश हैं जाते |

करते वार बेखौफ बहुतेरे, जब भी उनके जी में आते |

भय को त्याग, भरोसा धारो, हैं बाजू बलिष्ठ हमारे |

जन जिह्वा आक्रोश उबलता, चुप सत्ता के गलियारे ||

हाथ खोल दो और नहीं कुछ, इतना बस हम चाहते |

आँख दिखना होता है क्या, सब उनको हम बतलाते||

कापेंगें ये कायर सपनों में , करके शौर्य याद हमारे |

जन जिह्वा आक्रोश उबलता, चुप सत्ता के गलियारे ||

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उम्मेद देवल